बुलाती है मगर जाने का नईं

bulati hai magar jaane ka nahi shayari

बुलाती है मगर जाने का नईंवो दुनिया है उधर जाने का नईंज़मीं रखना पड़े सर पर तो रक्खोचलो हो तो ठहर जाने का नईं है दुनिया छोड़ना मंज़ूर लेकिनवतन को छोड़ कर जाने का नईंजनाज़े ही जनाज़े हैं सड़क परअभी माहौल मर जाने का नईं सितारे नोच कर ले जाऊँगामैं ख़ाली हाथ घर जाने का … Read more