तुसीं रल मिलि देहु मुबारकां

तुसीं रल मिलि देहु मुबारकां
मेरा सोहना सजन घरि आया ही रहाउ,

जिस सजन नूं मैं ढूंढेदी वतां
सो सजन मैं पायआ ही,

वेहड़ा तां अंङनु मेरा
भया सुहावणा
माथे नूर सुहायआ ही,

कहै हुसैन फ़क़ीर निमाणा
मुरशद दोस्त मिलायआ ही।

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