वो बुलाएँ तो क्या तमाशा हो

वो बुलाएँ तो क्या तमाशा हो
हम न जाएँ तो क्या तमाशा हो,

ये किनारों से खेलने वाले
डूब जाएँ तो क्या तमाशा हो,

बंदा-पर्वर जो हम पे गुज़री है
हम बताएँ तो क्या तमाशा हो,

आज हम भी तिरी वफ़ाओं पर
मुस्कुराएँ तो क्या तमाशा हो,

तेरी सूरत जो इत्तिफ़ाक़ से हम
भूल जाएँ तो क्या तमाशा हो,

वक़्त की चंद साअ’तें ‘साग़र’
लौट आएँ तो क्या तमाशा हो।

Wo Bulaen to Kya Tamasha Ho

wo bulaen to kya tamasha ho
hum na jaen to kya tamasha ho,

ye kinaron se khelne wale
dub jaen to kya tamasha ho,

banda-parwar jo hum pe guzri hai
hum bataen to kya tamasha ho,

aaj hum bhi teri wafaon par
muskuraen to kya tamasha ho,

teri surat jo ittifaq se hum
bhul jaen to kya tamasha ho,

waqt ki chand saaten ‘saghar’
laut aaen to kya tamasha ho.

وہ بلائیں تو کیا تماشا ہو

وہ بلائیں تو کیا تماشا ہو
ہم نہ جائیں تو کیا تماشا ہو

یہ کناروں سے کھیلنے والے
ڈوب جائیں تو کیا تماشا ہو

بندہ پرور جو ہم پہ گزری ہے
ہم بتائیں تو کیا تماشا ہو

آج ہم بھی تری وفاؤں پر
مسکرائیں تو کیا تماشا ہو

تیری صورت جو اتفاق سے ہم
بھول جائیں تو کیا تماشا ہو

وقت کی چند ساعتیں ساغرؔ
لوٹ آئیں تو کیا تماشا ہو

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