खोने वाले तेरा खोना नहीं देखा जाता

खोने वाले तेरा खोना नहीं देखा जाता
रोने वाले तेरा रोना नहीं देखा जाता

उजड़े वो घर भी जो आमान होते थे तेरे
लुटने वाले तेरा लुटना नहीं देखा जाता

हाथों से अपने तुझको यूँ जगाते हैं बच्चे
सोने वाले तेरा सोना नहीं देखा जाता

चलता था कैसे कैसे देखते थे तुझको सब
रुकने वाले तेरा रुकना नहीं देखा जाता

जलता था तो रोशन सारा ज़माना था तुझसे
बुझने वाले तेरा बुझना नहीं देखा जाता

राहों को तेरा आना भी सबब था इज़्ज़त का
जाने वाले तेरा जाना नहीं देखा जाता

ग़म में रोते हैं तेरे चाहने वाले ‘आसिफ़’
मरने वाले तेरा मरना नहीं देखा जाता

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