आँखों ने तिरी मुझसे सब बोल दिया है

आँखों ने तिरी मुझसे सब बोल दिया है
आँसू ने हक़ीक़त का दर खोल दिया है

आने को बहारें आती हैं दुनिया में
पर महबूब ने दर्द-ए-ग़म मोल दिया है

ग़म भरने लगेंगे पर ये याद रखो तुम
बाज़ारू हँसी को सब ने तोल दिया है

मरने से कहाँ पूरी होती है मुहब्बत
मैंने ज़हर को भी तेरा नाम दिया है

महकेगी फ़ज़ा, सहरा में फूल खिलेगा
माली ने बगीचे में दिल घोल दिया है

रोज़-मर्रा की तरह झेली है आज मुसीबत
पंछी का बसेरा उसने तोड़ दिया है

जब मिट्टी ने पत्थर को भी काट दिया था
तो पत्थर ने भी मिट्टी को फोड़ दिया है

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