मारा हमें इस दौर की आसाँ-तलबी ने

Mara Hamein Is Daur Ki Aasan-Talbi Ne - मारा हमें इस दौर की आसाँ-तलबी ने

मारा हमें इस दौर की आसाँ-तलबी ने कुछ और थे इस दौर में जीने के क़रीने, हर जाम लहू-रंग था देखा ये सभी ने क्यूँ शीशा-ए-दिल चूर था पूछा न किसी ने, अब हल्क़ा-ए-गिर्दाब ही आग़ोश-ए-सुकूँ है साहिल से बहुत दूर डुबोए हैं सफ़ीने, हर लम्हा-ए-ख़ामोश था इक दौर-ए-पुर-आशोब गुज़रे हैं इसी तौर से साल … Read more

सिवा है हद से अब एहसास की गिरानी भी

Siwa Hai Had Se Ab Ehsas Ki Girani Bhi - सिवा है हद से अब एहसास की गिरानी भी

सिवा है हद से अब एहसास की गिरानी भी गिराँ गुज़रने लगी उन की मेहरबानी भी, किस एहतिमाम से पढ़ते रहे सहीफ़ा-ए-ज़ीस्त चलें कि ख़त्म हुई अब तो वो कहानी भी, लिखो तो ख़ून-ए-जिगर से हवा की लहरों पर ये दास्ताँ अनोखी भी है पुरानी भी, किसी तरह से भी वो गौहर-ए-तलब न मिला हज़ार … Read more