जानती हूँ कि वो ख़फ़ा भी नहीं

jaanti hun ki wo khafa bhi nahin - जानती हूँ कि वो ख़फ़ा भी नहीं

जानती हूँ कि वो ख़फ़ा भी नहीं दिल किसी तौर मानता भी नहीं, क्या वफ़ा ओ जफ़ा की बात करें दरमियाँ अब तो कुछ रहा भी नहीं, दर्द वो भी सहा है तेरे लिए मेरी क़िस्मत में जो लिखा भी नहीं, हर तमन्ना सराब बनती रही इन सराबों की इंतिहा भी नहीं, हाँ चराग़ाँ की … Read more