जिस दिन को साजन बिछड़े हैं तिस दिन का दिल बीमार होया

jis din ko sajan bichhde hain tis din ka dil bimar hoya

जिस दिन को साजन बिछड़े हैं तिस दिन का दिल बीमार होया अब कठिन बना क्या फ़िक्र करूँ घर-बार सभी बीमार होया, दिन-रात तमाम आराम नहीं अब शाम पड़ी वो शाम नहीं वो साक़ी साहब जान नहीं अब पीना मय दुश्वार होया, बिन जानी जान ख़राब बही बा-आतिश-ए-शौक़ कबाब बही जों माही बहर-ए-बे-आब बही नित … Read more