मोहब्बत का तुझे इरफ़ान भी है

mohabbat ka tujhe irfan bhi hai - मोहब्बत का तुझे इरफ़ान भी है

मोहब्बत का तुझे इरफ़ान भी है मोहब्बत कुफ़्र भी ईमान भी है, तज़ाद-ए-हज़रत-ए-इंसाँ न पूछो फ़रिश्ता भी है ये शैतान भी है, यही साबित हुआ है ज़िंदगी से जो दाना है वही नादान भी है, बहुत बे-रब्त है रूदाद-ए-हस्ती इस अफ़्साने का कुछ उन्वान भी है, इसी का ज़िंदगी है नाम शायद कुछ उलझन भी … Read more