राजे ने अपनी रखवाली की

राजे ने अपनी रखवाली की

राजे ने अपनी रखवाली की किला बनाकर रहा बड़ी-बड़ी फ़ौजें रखीं, चापलूस कितने सामन्त आए मतलब की लकड़ी पकड़े हुए कितने ब्राह्मण आए पोथियों में जनता को बाँधे हुए। कवियों ने उसकी बहादुरी के गीत गाए लेखकों ने लेख लिखे ऐतिहासिकों ने इतिहास के पन्ने भरे नाट्य-कलाकारों ने कितने नाटक रचे रंगमंच पर खेले, जनता … Read more