आरज़ू जिन की है उन की अंजुमन तक आ गए

aarzu jin ki hai un ki anjuman tak aa gae - आरज़ू जिन की है उन की अंजुमन तक आ गए

आरज़ू जिन की है उन की अंजुमन तक आ गए निकहत-ए-गुल के सहारे हम चमन तक आ गए, बे-रुख़ी से आप जब बेगाना-पन तक आ गए आज हम भी जुरअत-ए-जुर्म-ए-सुख़न तक आ गए, मय-कदा फिर भी ग़नीमत है जहाँ इस दौर में एक ही मरकज़ पे शैख़-ओ-बरहमन तक आ गए, जल बुझे अहल-ए-जुनूँ लेकिन किसी … Read more

सोज़-ए-ग़म भी नहीं फ़ुग़ाँ भी नहीं

soz-e-gham bhi nahin fughan bhi nahin - सोज़-ए-ग़म भी नहीं फ़ुग़ाँ भी नहीं

सोज़-ए-ग़म भी नहीं फ़ुग़ाँ भी नहीं जल बुझी आग अब धुआँ भी नहीं, तू ब-ज़ाहिर वो मेहरबाँ भी नहीं मन्नतें मेरी राएगाँ भी नहीं, जाने क्यूँ तुम से कुछ नहीं कहते वर्ना हम इतने बे-ज़बाँ भी नहीं, वो निगाहें कि बे-नियाज़ भी हैं और उन से कहीं अमाँ भी नहीं, दीदा-ओ-दिल हैं कब से चश्म-ब-राह … Read more