इसीलिए इतनी सूख गई हो

इसीलिए तुम इतनी सूख गई हो - isliye itni sookh gayi ho

भारतीय कवि शंख घोष जी की मूल बंगला भाषा से उत्पल बैनर्जी द्वारा हिंदी भाषा में अनुवादित एक कविता अर्थात रचना। ————————————— बहुत दिनों से तुमने बादलों से बातचीत नहीं की इसीलिए तुम इतनी सूख गई हो आओ मैं तुम्हारा मुँह पोंछ दूँ, सब लोग कला ढूँढ़ते हैं, रूप ढूँढ़ते हैं हमें कला और रूप … Read more

चाहत का तूफ़ान

Chahat Ka Toofan - चाहत का तूफ़ान

भारतीय कवि शंख घोष जी की मूल बंगला भाषा से सुलोचना वर्मा और शिव किशोर तिवारी द्वारा हिंदी भाषा में अनुवादित एक कविता अर्थात रचना। —————————————————————- इस छोर से उस छोर तक घूमती नि:शब्द निर्जनता में अन्धेरी शाम की तेज़ अकेली हवा में तुम उठाती हो अपना बादलों-सा ठण्डा, चान्द की तरह पाण्डुर नीरक्त, सफ़ेद … Read more