वफ़ादारों पे आफ़त आ रही है

Wafadaron Pe Aafat Aa Rahi Hai - वफ़ादारों पे आफ़त आ रही है

वफ़ादारों पे आफ़त आ रही है मियाँ ले लो जो क़ीमत आ रही है, मैं उस से इतने वादे कर चुका हूँ मुझे इस बार ग़ैरत आ रही है, न जाने मुझ में क्या देखा है उस ने मुझे उस पर मोहब्बत आ रही है, बदलता जा रहा है झूट सच में कहानी में सदाक़त … Read more

अश्क पीने के लिए ख़ाक उड़ाने के लिए

Ashk Pine Ke Liye Khak Udane Ke Liye - अश्क पीने के लिए ख़ाक उड़ाने के लिए

अश्क पीने के लिए ख़ाक उड़ाने के लिए अब मिरे पास ख़ज़ाना है लुटाने के लिए, ऐसी दफ़अ’ न लगा जिस में ज़मानत मिल जाए मेरे किरदार को चुन अपने निशाने के लिए, किन ज़मीनों पे उतारोगे अब इमदाद का क़हर कौन सा शहर उजाड़ोगे बसाने के लिए, मैं ने हाथों से बुझाई है दहकती … Read more