परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है

paro ko khol zamana udan dekhta hai

परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है, मिला है हुस्न तो इस हुस्न की हिफ़ाज़त कर सँभल के चल तुझे सारा जहान देखता है, कनीज़ हो कोई या कोई शाहज़ादी हो जो इश्क़ करता है कब ख़ानदान देखता है, घटाएँ उठती हैं बरसात होने लगती है जब … Read more