शायरी का इंक़लाब

Shayari Ka Inquilab - शायरी का इंक़लाब

एक दिन अकस्मात एक पुराने मित्र से हो गई मुलाकात कहने लगे-“जो लोग कविता को कैश कर रहे है वे ऐश कर रहे हैं लिखने वाले मौन है श्रोता तो यह देखता है कि पढ़ने वाला कौन है लोग-बाग चार-ग़ज़लें और दो लोक गीत चुराकर अपने नाम से सुना रहे हैं भगवान ने उन्हे ख़ूबसूरत … Read more

एक से एक बढ़ के

Ek Se Ek Badh Ke - एक से एक बढ़ के

हमारे एक फ्रैंड हैं सूरत-शक्ल से बिल्कुल इंग्लैंड हैं एक दिन बोले- “यार तीन लड़के हैं एक से एक बढ़ के हैं एक नेता है हर पाँचवें साल दस-बीस हज़ार की चोट देता है पिछले दस साल से चुनाव लड़ रहा है नहीं बन पाया सड़ा-सा एम.एल.ए. बोलो तो कहता है- “अनुभव बढ़ रहा है, … Read more