होंटों से कम – सज्जाद ज़हीर की नज़्म

honton se kam - होंटों से कम

होंटों से कम गर्म महकती साँसों से नम आँखों से तुम ने पूछा क्या हम से मोहब्बत करते हो बस एक हर्फ़ मुँह से निकला हाँ कितना मा’मूली छोटा सा ये ना-मुकम्मल लफ़्ज़ है कैसे दिखलाएँ तुम को उस पोशीदा ख़्वाबीदा वादी को जिस में नूर की बारिश होती है झरने बहते हैं नग़्मों के … Read more

तुम ने मोहब्बत को मरते देखा है

tum ne mohabbat ko marte dekha hai - तुम ने मोहब्बत को मरते देखा है

तुम ने मोहब्बत को मरते देखा है? चमकती हँसती आँखें पथरा जाती हैं दिल के दालानों में परेशान गर्म लू के झक्कड़ चलते हैं, गुलाबी एहसास के बहते हुए ख़ुश्क और लगता है जैसे किसी हरी-भरी खेती पर पाला पड़ जाए, लेकिन या-रब आरज़ू के इन मुरझाए सूखे फूलों इन गुम-शुदा जन्नतों से कैसी संदली … Read more