तड़प के रात बसर की जो इक मुहिम सर की

तड़प के रात बसर की जो इक मुहिम सर की - tadap ke raat basar ki jo ek muhim sar ki

तड़प के रात बसर की जो इक मुहिम सर की छुरी थी मेरे लिए जो शिकन थी बिस्तर की, अरक़ अरक़ हैं जो गर्मी से रोज़-ए-महशर की पनाह ढूँडते हैं मेरे दामन-ए-तर की, हुआ गुमान उसी शोख़-ए-सुस्त-पैमाँ का अगर हवा से भी ज़ंजीर हिल गई दर की, इसी तरफ़ तिरे क़ुर्बां निगाह-ए-शर्म-आलूद मुझी पे तेज़ … Read more

पैग़ाम ज़िंदगी ने दिया मौत का मुझे

paigham zindagi ne diya maut ka mujhe - पैग़ाम ज़िंदगी ने दिया मौत का मुझे

पैग़ाम ज़िंदगी ने दिया मौत का मुझे मरने के इंतिज़ार में जीना पड़ा मुझे, इस इंक़लाब की भी कोई हद है दोस्तो ना-आश्ना समझते हैं अब आश्ना मुझे, कश्ती पहुँच सकेगी ये ता साहिल-ए-मुराद धोका न दे ख़ुदा के लिए ना ख़ुदा मुझे, वो तूल-ए-उम्र जिस में न हो लुत्फ़-ए-ज़िंदगी मिल जाए मिस्ल-ए-ख़िज़्र तो क्या … Read more