मानुस हौं तो वही रसखान

manus ho to vahi raskhan - मानुस हौं तो वही रसखान

मानुस हौं तो वही रसखान, बसौं मिलि गोकुल गाँव के ग्वारन जो पसु हौं तो कहा बस मेरो, चरौं नित नंद की धेनु मँझारन पाहन हौं तो वही गिरि को, जो धर्यो कर छत्र पुरंदर धारन जो खग हौं तो बसेरो करौं मिलि कालिंदीकूल कदम्ब की डारन, या लकुटी अरु कामरिया पर, राज तिहूँ पुर … Read more