ज़मीं पर रौशनी ही रौशनी है

Zamin Par Raushni Hi Raushni Hai - ज़मीं पर रौशनी ही रौशनी है

ज़मीं पर रौशनी ही रौशनी है ख़ला में इक किरन गुम हो गई है, मैं तन्हा जा रहा हूँ सू-ए-मंज़िल ये परछाईं कहाँ से आ रही है, ये शाम और रौशनी की ये क़तारें उदासी और गहरी हो गई है, उरूज-ए-माह है और मक़बरों पर अबद की चाँदनी चटकी हुई है, उभार ऐ मौज-ए-तूफ़ाँ-ख़ेज़ मुझ … Read more

जहाँ माबूद ठहराया गया हूँ

Jahan Mabud Thahraya Gaya Hun - जहाँ माबूद ठहराया गया हूँ

जहाँ माबूद ठहराया गया हूँ वहीं सूली पे लटकाया गया हूँ, सुना हर बार मेरा कलमा-ए-सिदक़ मगर हर बार झुठलाया गया हूँ, कभी माज़ी का जैसे तज़्किरा हो ज़बाँ पर इस तरह लाया गया हूँ, अभी तदफ़ीन बाक़ी है अभी तो लहू से अपने नहलाया गया हूँ, दवामी अज़्मतों के मक़बरे में हज़ारों बार दफ़नाया … Read more