ख़ुद को कितनी देर मनाना पड़ता है

Khud Ko Kitni Der Manana Padta Hai - ख़ुद को कितनी देर मनाना पड़ता है

ख़ुद को कितनी देर मनाना पड़ता है लफ़्ज़ों को जब रंग लगाना पड़ता है, चोटी तक पहुँची राहों से सीखो भी कैसे पर्वत काट के आना पड़ता है, बच्चों की मुस्कान बहुत ही महँगी है दो दो पैसे रोज़ बचाना पड़ता है, सच का कपड़ा फूल से हल्का होता है झूट का पर्वत लाद के … Read more

लाएक़ कुछ नालायक़ बच्चे होते हैं

Laeq Kuchh Nalaeq Bachche Hote Hain - लाएक़ कुछ नालायक़ बच्चे होते हैं

लाएक़ कुछ नालायक़ बच्चे होते हैं शेर कहाँ सारे ही अच्छे होते हैं, औरों के दुख में आँखें भर आती हैं ऐसे आँसू ख़ालिस सच्चे होते हैं, बच्चों की ख़ुशियाँ ढेरों सुख देती हैं हाथ में उम्मीदों के लच्छे होते हैं, हम ही उल्टा-सीधा सोचा करते हैं रिश्ते थोड़े पक्के कच्चे होते हैं, जब आँखों … Read more