ऐसा जीना भी क्या है मर मर के

Aisa Jeena Bhi Kya Hai Mar Mar Ke - ऐसा जीना भी क्या है मर मर के

ऐसा जीना भी क्या है मर मर के वो जहाँ भी रहे रहे डर के, अब किसी तरह दिल नहीं लगता घर में सब कुछ तो है सिवा घर के, साँस का बोझ अब नहीं उठता जिस्म ख़ाली है धड़ बिना सर के, उस को जाने की कितनी जल्दी थी बात सारी कही प कम … Read more

किस हुनर के मुज़ाहिरे में हो

Kis Hunar Ke Muzahire Mein Ho - किस हुनर के मुज़ाहिरे में हो

किस हुनर के मुज़ाहिरे में हो तुम तो ख़ुद से मुक़ाबले में हो, क़त्ल करना तो उस को ठीक नहीं इश्क़ की मौत हादसे में हो, चाँद आएगा सुल्ह करने को जाग जाओ मुग़ालते में हो, नाम मैं दूसरा मोहब्बत का तुम हो पागल या फिर नशे में हो, आते आते हँसी यूँ फिसली है … Read more