ज़ख़्म दबे तो फिर नया तीर चला दिया करो

zakhm dabe to phir naya tir chala diya karo - ज़ख़्म दबे तो फिर नया तीर चला दिया करो

ज़ख़्म दबे तो फिर नया तीर चला दिया करो दोस्तो अपना लुत्फ़-ए-ख़ास याद दिला दिया करो, एक इलाज-ए-दाइमी है तो बरा-ए-तिश्नगी पहले ही घूँट में अगर ज़हर मिला दिया करो, शहर तलब करे अगर तुम से इलाज-ए-तीरगी साहिब-ए-इख़्तियार हो आग लगा दिया करो, मक़्तल-ए-ग़म की रौनक़ें ख़त्म न होने पाएँगी कोई तो आ ही जाएगा … Read more