तिरे करम से ख़ुदाई में यूँ तो क्या न मिला

tere karam se Khudai mein yun to kya na mila - तिरे करम से ख़ुदाई में यूँ तो क्या न मिला

तिरे करम से ख़ुदाई में यूँ तो क्या न मिला मगर जो तू न मिला ज़ीस्त का मज़ा न मिला, हयात-ए-शौक़ की ये गर्मियाँ कहाँ होतीं ख़ुदा का शुक्र हमें नाला-ए-रसा न मिला, अज़ल से फ़ितरत-ए-आज़ाद ही थी आवारा ये क्यूँ कहें कि हमें कोई रहनुमा न मिला, ये काएनात किसी का ग़ुबार-ए-राह सही दलील-ए-राह … Read more