साहिल पे तेरे बअद की वीरानी खा गई

Sahil Pe Tere Baad Ki Virani Kha Gai - साहिल पे तेरे बअद की वीरानी खा गई

साहिल पे तेरे बअद की वीरानी खा गई उतरे समुंदरों में तो तुग़्यानी खा गई, ताक़त ये चार दिन की है तारीख़ पढ़ ज़रा सुल्तान कितने थे जिन्हें सुल्तानी खा गई, दुनिया बदल गई थी कोई ग़म न था मुझे तुम भी बदल गए थे ये हैरानी खा गई। Sahil Pe Tere Baad Ki Virani … Read more

अपनी उलझन को बढ़ाने की ज़रूरत क्या है

Apni Uljhan Ko Badhane Ki Zarurat Kya Hai - अपनी उलझन को बढ़ाने की ज़रूरत क्या है

अपनी उलझन को बढ़ाने की ज़रूरत क्या है छोड़ना है तो बहाने की ज़रूरत क्या है, लग चुकी आग तो लाज़िम है धुआँ उट्ठेगा दर्द को दिल में छुपाने की ज़रूरत क्या है, उम्र भर रहना है ताबीर से गर दूर तुम्हें फिर मिरे ख़्वाब में आने की ज़रूरत क्या है, अजनबी रंग छलकता हो … Read more