रात पर्दे से ज़रा मुँह जो किसू का निकला

raat parde se zara munh jo kisu ka nikla - रात पर्दे से ज़रा मुँह जो किसू का निकला

रात पर्दे से ज़रा मुँह जो किसू का निकला शोला समझा था उसे मैं प भभूका निकला, महर ओ मह उस की फबन देख के हैरान रहे जब वरक़ यार की तस्वीर-ए-दो-रू का निकला, ये अदा देख के कितनों का हुआ काम तमाम नीमचा कल जो टुक उस अरबदा-जू का निकला, मर गई सर्व पे … Read more