हम हैं मता-ए-कूचा-ओ-बाज़ार की तरह

hum hain mata e kucha o bazar ki tarah - हम हैं मता-ए-कूचा-ओ-बाज़ार की तरह

हम हैं मता-ए-कूचा-ओ-बाज़ार की तरह उठती है हर निगाह ख़रीदार की तरह, इस कू-ए-तिश्नगी में बहुत है कि एक जाम हाथ आ गया है दौलत-ए-बेदार की तरह, वो तो कहीं है और मगर दिल के आस-पास फिरती है कोई शय निगह-ए-यार की तरह, सीधी है राह-ए-शौक़ पे यूँही कहीं कहीं ख़म हो गई है गेसू-ए-दिलदार … Read more

कोई हम-दम न रहा कोई सहारा न रहा

koi ham dam na raha koi sahaara na raha - कोई हम-दम न रहा कोई सहारा न रहा

कोई हम-दम न रहा कोई सहारा न रहा हम किसी के न रहे कोई हमारा न रहा, शाम तन्हाई की है आएगी मंज़िल कैसे जो मुझे राह दिखा दे वही तारा न रहा, ऐ नज़ारो न हँसो मिल न सकूँगा तुम से तुम मिरे हो न सके मैं भी तुम्हारा न रहा, क्या बताऊँ मैं … Read more