फिर कोई तस्वीर उभरी ख़्वाब में

Phir Koi Taswir Ubhri Khwab Mein - फिर कोई तस्वीर उभरी ख़्वाब में

फिर कोई तस्वीर उभरी ख़्वाब में बे-क़रारी है दिल-ए-बेताब में, साहिल-ए-दरिया पे क्यों लर्ज़ां हो तुम मैं चला हँसता हुआ गिर्दाब में, रौशनी मिल जाए बातिन को मिरे कुछ इज़ाफ़ा हो जो ग़म के बाब में, अब कहाँ उस चेहरा-ए-ज़ेबा का अक्स बह गया जो कुछ कि था सैलाब में, ख़्वाब ख़ुश है देख कर … Read more

ये तो अच्छा है कि दुख-दर्द सुनाने लग जाओ

Ye to Achchha Hai Ki Dukh-Dard Sunane Lag Jao - ये तो अच्छा है कि दुख-दर्द सुनाने लग जाओ

ये तो अच्छा है कि दुख-दर्द सुनाने लग जाओ हर किसी को न मगर ज़ख़्म दिखाने लग जाओ, नील के पानियो रस्ते में न हाइल होना क्या पता ज़र्ब-ए-कलीमी से ठिकाने लग जाओ, कितनी मुश्किल से तो आए हो ज़रा ठहरो भी सहल अंदाज़ में इस तरह न जाने लग जाओ, सामने आओ तो जैसे … Read more