जिस शजर पर समर नहीं होता

Jis Shajar Par Samar Nahin Hota - जिस शजर पर समर नहीं होता

जिस शजर पर समर नहीं होता उस को पत्थर का डर नहीं होता, आँख में भी चमक नहीं होती जब वो पेश-ए-नज़र नहीं होता, मय-कदे में ये एक ख़ूबी है नासेहा तेरा डर नहीं होता, अब तो बाज़ार भी हैं बे-रौनक़ कोई यूसुफ़ इधर नहीं होता, जो सदफ़ साहिलों पे रह जाए उस में कोई … Read more

लब पे किसी उजड़ी हुई जागीर का मातम

Lab Pe Kisi Ujdi Hui Jagir Ka Matam - लब पे किसी उजड़ी हुई जागीर का मातम

लब पे किसी उजड़ी हुई जागीर का मातम हर लफ़्ज़ मिरा हल्क़ा-ए-ज़ंजीर का मातम, दिल में कहीं बुझते हुए अरमानों का नौहा आँखों में किसी याद की तस्वीर का मातम, हर सोच में संगीन फ़ज़ाओं का फ़साना हर फ़िक्र में शामिल हुआ तहरीर का मातम, जब से हुआ मालूम कि ये चाँद है पत्थर करता … Read more