बेहोशियों ने और ख़बरदार कर दिया

behoshiyon ne aur khabardar kar diya - बेहोशियों ने और ख़बरदार कर दिया

बेहोशियों ने और ख़बरदार कर दिया सोई जो अक़्ल रूह ने बेदार कर दिया, अल्लाह रे हुस्न-ए-दोस्त की आईना-दारियाँ अहल-ए-नज़र को नक़्श-ब-दीवार कर दिया, या रब ये भेद क्या है कि राहत की फ़िक्र ने इंसाँ को और ग़म में गिरफ़्तार कर दिया, दिल कुछ पनप चला था तग़ाफ़ुल की रस्म से फिर तेरे इल्तिफ़ात … Read more

जब से मरने की जी में ठानी है

jab se marne ki ji mein thani hai - जब से मरने की जी में ठानी है

जब से मरने की जी में ठानी है किस क़दर हम को शादमानी है, शाइरी क्यूँ न रास आए मुझे ये मिरा फ़न्न-ए-ख़ानदानी है, क्यूँ लब-ए-इल्तिजा को दूँ जुम्बिश तुम न मानोगे और न मानी है, आप हम को सिखाएँ रस्म-ए-वफ़ा मेहरबानी है मेहरबानी है, दिल मिला है जिन्हें हमारा सा तल्ख़ उन सब की … Read more