ख़्वाब की तरह बिखर जाने को जी चाहता है

Khwab Ki Tarah Bikhar Jaane Ko Ji Chahta Hai - ख़्वाब की तरह बिखर जाने को जी चाहता है

ख़्वाब की तरह बिखर जाने को जी चाहता है ऐसी तन्हाई कि मर जाने को जी चाहता है, घर की वहशत से लरज़ता हूँ मगर जाने क्यूँ शाम होती है तो घर जाने को जी चाहता है, डूब जाऊँ तो कोई मौज निशाँ तक न बताए ऐसी नद्दी में उतर जाने को जी चाहता है, … Read more

अज़ाब ये भी किसी और पर नहीं आया

Azab Ye Bhi Kisi Aur Par Nahin Aaya - अज़ाब ये भी किसी और पर नहीं आया

अज़ाब ये भी किसी और पर नहीं आया कि एक उम्र चले और घर नहीं आया, उस एक ख़्वाब की हसरत में जल बुझीं आँखें वो एक ख़्वाब कि अब तक नज़र नहीं आया, करें तो किस से करें ना-रसाइयों का गिला सफ़र तमाम हुआ हम-सफ़र नहीं आया, दिलों की बात बदन की ज़बाँ से … Read more