अपने हमराह जो आते हो इधर से पहले

apne hamrah jo aate ho idhar se pahle - अपने हमराह जो आते हो इधर से पहले

अपने हमराह जो आते हो इधर से पहले दश्त पड़ता है मियाँ इश्क़ में घर से पहले, चल दिए उठ के सू-ए-शहर-ए-वफ़ा कू-ए-हबीब पूछ लेना था किसी ख़ाक-बसर से पहले, इश्क़ पहले भी किया हिज्र का ग़म भी देखा इतने तड़पे हैं न घबराए न तरसे पहले, जी बहलता ही नहीं अब कोई साअ’त कोई … Read more