नाला-ए-ग़म शोला-असर चाहिए

nala-e-gham shoala-asar chahiye - नाला-ए-ग़म शोला-असर चाहिए

नाला-ए-ग़म शोला-असर चाहिए चाक-ए-दिल अब ता-ब-जिगर चाहिए, कितने मह-ओ-नज्म हुए नज़्र-ए-शब ऐ ग़म-ए-दिल अब तो सहर चाहिए, मंज़िलें हैं ज़ेर-ए-कफ़-ए-पा मगर इक ज़रा अज़्म-ए-सफ़र चाहिए, आइना-ख़ाने में है दरकार क्या चाहिए इक संग अगर चाहिए, दूर है दिल मंज़िल-ए-ग़म से हनूज़ इक ग़लत अंदाज़-ए-नज़र चाहिए, तिश्नगी-ए-लब का तक़ाज़ा है अब बादा हो या ज़हर मगर … Read more

रात सुनसान दश्त ओ दर ख़ामोश

raat sunsan dasht o dar khamosh - रात सुनसान दश्त ओ दर ख़ामोश

रात सुनसान दश्त ओ दर ख़ामोश चाँद तारे शजर हजर ख़ामोश, कोई आवाज़-ए-पा न बाँग-ए-जरस कारवाँ और इस क़दर ख़ामोश, हर तरफ़ इक मुहीब सन्नाटा दिल धड़कता तो है मगर ख़ामोश, हुए जाते हैं किस लिए आख़िर हम-सफ़र बात बात पर ख़ामोश, हैं ये आदाब-ए-रहगुज़र कि ख़ौफ़ राह-रौ चुप हैं राहबर ख़ामोश, मुख़्तसर हो न … Read more