सुन तो सही जहाँ में है तेरा फ़साना क्या

sun to sahi jahan mein hai tera fasana kya - सुन तो सही जहाँ में है तेरा फ़साना क्या

सुन तो सही जहाँ में है तेरा फ़साना क्या कहती है तुझ को ख़ल्क़-ए-ख़ुदा ग़ाएबाना क्या, क्या क्या उलझता है तिरी ज़ुल्फ़ों के तार से बख़िया-तलब है सीना-ए-सद-चाक शाना क्या, ज़ेर-ए-ज़मीं से आता है जो गुल सो ज़र-ब-कफ़ क़ारूँ ने रास्ते में लुटाया ख़ज़ाना क्या, उड़ता है शौक़-ए-राहत-ए-मंज़िल से अस्प-ए-उम्र महमेज़ कहते हैंगे किसे ताज़ियाना … Read more