तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त नशीं था

Tum Se Pahle Wo Jo Ek Shakhs Yahan Takht Nashin Tha

तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त-नशीं था उस को भी अपने ख़ुदा होने पे इतना ही यक़ीं था, कोई ठहरा हो जो लोगों के मुक़ाबिल तो बताओ वो कहाँ हैं कि जिन्हें नाज़ बहुत अपने तईं था, आज सोए हैं तह-ए-ख़ाक न जाने यहाँ कितने कोई शोला कोई शबनम कोई महताब-जबीं था, … Read more