मिरी रात मेरा चराग़ मेरी किताब दे

meri raat mera charagh meri kitab de - मिरी रात मेरा चराग़ मेरी किताब दे

मिरी रात मेरा चराग़ मेरी किताब दे मिरा सहरा बाँध ले पाँव से मुझे आब दे, मिरे नुक्ता-दाँ तिरा फ़हम अपनी मिसाल है मैं हूँ एक सादा सवाल कोई जवाब दे, मिरी चश्म-ए-नम किसी रतजगे में उलझ गई मिरी नींद ओढ़ ले रात भर मुझे ख़्वाब दे, मिरे गोश्वारे में कौन भरता गया लहू ऐ … Read more

मोहब्बत में कोई सदमा उठाना चाहिए था

mohabbat mein koi sadma uthana chahiye tha - मोहब्बत में कोई सदमा उठाना चाहिए था

मोहब्बत में कोई सदमा उठाना चाहिए था भुलाया था जिसे वो याद आना चाहिए था, गिरी थीं घर की दीवारें तो सेहन-ए-दिल में हम को घरौंदे का कोई नक़्शा बनाना चाहिए था, उठाना चाहिए थी राख शहर-ए-आरज़ू की फिर इस के बाद इक तूफ़ान उठाना चाहिए था, कोई तो बात करना चाहिए थी ख़ुद से … Read more