रिश्तों के जब तार उलझने लगते हैं

Rishton Ke Jab Tar Ulajhne Lagte Hain - रिश्तों के जब तार उलझने लगते हैं

रिश्तों के जब तार उलझने लगते हैं आपस में घर-बार उलझने लगते हैं, माज़ी की आँखों में झाँक के देखूँ तो कुछ चेहरे हर बार उलझने लगते हैं, साल में इक ऐसा मौसम भी आता है फूलों से ही ख़ार उलझने लगते हैं, घर की तन्हाई में अपने-आप से हम बन कर इक दीवार उलझने … Read more

आईने से पर्दा कर के देखा जाए

Aaine Se Parda Kar Ke Dekha Jae - आईने से पर्दा कर के देखा जाए

आईने से पर्दा कर के देखा जाए ख़ुद को इतना तन्हा कर के देखा जाए, हम भी तो देखें हम कितने सच्चे हैं ख़ुद से भी इक वअ’दा कर के देखा जाए, दीवारों को छोटा करना मुश्किल है अपने क़द को ऊँचा कर के देखा जाए, रातों में इक सूरज भी दिख जाएगा हर मंज़र … Read more