रोज़ कहाँ से कोई नया-पन अपने आप में लाएँगे

roz kahan se koi naya-pan apne aap mein laenge - रोज़ कहाँ से कोई नया-पन अपने आप में लाएँगे

रोज़ कहाँ से कोई नया-पन अपने आप में लाएँगे तुम भी तंग आ जाओगे इक दिन हम भी उक्ता जाएँगे, चढ़ता दरिया एक न इक दिन ख़ुद ही किनारे काटेगा अपने हँसते चेहरे कितने तूफ़ानों को छुपाएँगे, आग पे चलते चलते अब तो ये एहसास भी खो बैठे क्या होगा ज़ख़्मों का मुदावा दामन कैसे … Read more

चुप-चाप सुलगता है दिया तुम भी तो देखो

chup chap sulagta hai diya tum bhi to dekho - चुप-चाप सुलगता है दिया तुम भी तो देखो

चुप-चाप सुलगता है दिया तुम भी तो देखो किस दर्द को कहते हैं वफ़ा तुम भी तो देखो, महताब-ब-कफ़ रात कसे ढूँड रही है कुछ दूर चलो आओ ज़रा तुम भी तो देखो, किस तरह किनारों को है सीने से लगाए ठहरे हुए पानी की अदा तुम भी तो देखो, यादों के समन-ज़ार से आई … Read more