बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी

baat karni mujhe mushkil kabhi aisi to na thi - बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी

बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी जैसी अब है तिरी महफ़िल कभी ऐसी तो न थी, ले गया छीन के कौन आज तिरा सब्र ओ क़रार बे-क़रारी तुझे ऐ दिल कभी ऐसी तो न थी, उस की आँखों ने ख़ुदा जाने किया क्या जादू कि तबीअ’त मिरी माइल कभी ऐसी तो न … Read more

लगता नहीं है जी मेरा उजड़े दयार में

lagta nahin hai dil mera ujde dayar mein

लगता नहीं है जी मेरा उजड़े दयार में किस की बनी है आलम-ए-नापायेदार में, बुलबुल को बागबां से न सैय्याद से गिला किस्मत में कैद थी लिखी फ़स्ले बहार में, कह दो इन हसरतों से कहीं और जा बसें इतनी जगह कहाँ है दिल-ए-दाग़दार में, इक शाख़-ए-गुल पे बैठ के बुलबुल है शादमां कांटे बिछा … Read more