मैं दस्तरस से तुम्हारी निकल भी सकता हूँ

main dastaras se tumhaari nikal bhi sakta hun - मैं दस्तरस से तुम्हारी निकल भी सकता हूँ

मैं दस्तरस से तुम्हारी निकल भी सकता हूँ ये सोच लो कि मैं रस्ता बदल भी सकता हूँ, तुम्हारे बाद ये जाना कि मैं जो पत्थर था तुम्हारे बाद किसी दम पिघल भी सकता हूँ, क़लम है हाथ में किरदार भी मिरे बस में अगर मैं चाहूँ कहानी बदल भी सकता हूँ, मिरी सिरिश्त में … Read more

जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी

jis taraf chahun pahunch jaun masafat kaisi - जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी

जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी मैं तो आवाज़ हूँ आवाज़ की हिजरत कैसी, सुनने वालों की समाअत गई गोयाई भी क़िस्सा-गो तू ने सुनाई थी हिकायत कैसी, हम जुनूँ वाले हैं हम से कभी पूछो प्यारे दश्त कहते हैं किसे दश्त की वहशत कैसी, आप के ख़ौफ़ से कुछ हाथ बढ़े हैं लेकिन … Read more