जुनून-ए-शौक़ अब भी कम नहीं है

जुनून-ए-शौक़ अब भी कम नहीं है - junun-e-shauq ab bhi kam nahin hai

जुनून-ए-शौक़ अब भी कम नहीं है मगर वो आज भी बरहम नहीं है, बहुत मुश्किल है दुनिया का सँवरना तिरी ज़ुल्फ़ों का पेच-ओ-ख़म नहीं है, बहुत कुछ और भी है इस जहाँ में ये दुनिया महज़ ग़म ही ग़म नहीं है, तक़ाज़े क्यूँ करूँ पैहम न साक़ी किसे याँ फ़िक्र-ए-बेश-ओ-कम नहीं है, उधर मश्कूक है … Read more

हुस्न को बे-हिजाब होना था

husn ko be hijab hona tha - हुस्न को बे हिजाब होना था

हुस्न को बे-हिजाब होना था शौक़ को कामयाब होना था हिज्र में कैफ़-ए-इज़्तिराब न पूछ ख़ून-ए-दिल भी शराब होना था तेरे जल्वों में घिर गया आख़िर ज़र्रे को आफ़्ताब होना था कुछ तुम्हारी निगाह काफ़िर थी कुछ मुझे भी ख़राब होना था रात तारों का टूटना भी ‘मजाज़’ बाइस-ए-इज़्तिराब होना था। husn ko be hijab … Read more