घर को कैसा भी तुम सजा रखना

ghar ko kaisa bhi tum saja rakhna - घर को कैसा भी तुम सजा रखना

घर को कैसा भी तुम सजा रखना कहीं ग़म का भी दाख़िला रखना, गर किसी को समझना अपना तुम धोका खाने का हौसला रखना, इतनी क़ुर्बत किसी से मत रक्खो कुछ ज़रूरी है फ़ासला रखना, इन की हर बात मीठी होती है झूटी बातों का मत गिला रखना, ज़िंदगी एक बार मिलती है उस को … Read more

ज़िंदगी में तुझ को पाना आज तक भूला नहीं

zindagi mein tujh ko pana aaj tak bhula nahin - ज़िंदगी में तुझ को पाना आज तक भूला नहीं

ज़िंदगी में तुझ को पाना आज तक भूला नहीं फिर तिरा चुपके से जाना आज तक भूला नहीं पड़ के पैरों पर परस्तिश की इजाज़त चाहना और मिरा वो बौखलाना आज तक भूला नहीं हर बशर है ख़ुद-ग़रज़ मेहर-ओ-वफ़ा कुछ भी नहीं हम को तन्हा छोड़ जाना आज तक भूला नहीं तुम हमारे थे ही … Read more