फ़िक्र सोई है सर-ए-शाम जगा दी जाए

Fikr Soi Hai Sar-E-Sham Jaga Di Jae - फ़िक्र सोई है सर-ए-शाम जगा दी जाए

फ़िक्र सोई है सर-ए-शाम जगा दी जाए एक बुझती सी अँगीठी को हवा दी जाए, किसी जंगल में अगर हो तो बुझा दी जाए कैसे तन-मन में लगी आग दबा दी जाए, तल्ख़ी-ए-ज़ीस्त की शिद्दत का तक़ाज़ा है यही ज़ेहन ओ दिल में जो मसाफ़त है घटा दी जाए, तीरगी शब की बसी जाए है … Read more

एक लफ़्ज़ आ गया था जो मेरी ज़बान पर

Ek Lafz Aa Gaya Tha Jo Meri Zaban Par - एक लफ़्ज़ आ गया था जो मेरी ज़बान पर

एक लफ़्ज़ आ गया था जो मेरी ज़बान पर छाया रहा न जाने वो किस किस के ध्यान पर, मुझ को तलाश करते हो औरों के दरमियाँ हैरान हो रहा हूँ तुम्हारे गुमान पर, महफ़िल में दोस्तों की वही नग़्मा बन गया शब-ख़ून का जो शोर था मेरे मकान पर, बे-शक ज़मीं हनूज़ है अपने … Read more