तबाही का बहाना ढूँढती है

tabahi ka bahana dhundti hai - तबाही का बहाना ढूँडती है

तबाही का बहाना ढूँढती है हवा एड़ी के बल फिर घूमती है, अंधेरे सुरमई बादल हैं ऐसे ज़मीं अब आसमाँ को ढूँढती है, ख़मोशी मुर्तइश होने लगी है कहीं बरबत की लय क्यूँ गूँजती है। Tabahi Ka Bahana Dhundti Hai tabahi ka bahana dhundti hai hawa edi ke bal phir ghumti hai, andhere surmai baadal … Read more

ता’न तंज़ आवाज़े सुन रहे हो अब बोलो

tan tanz aawaze sun rahe ho ab bolo - ता'न तंज़ आवाज़े सुन रहे हो अब बोलो

ता’न तंज़ आवाज़े सुन रहे हो अब बोलो बोलने के ख़ामियाज़े सुन रहे हो अब बोलो, बात बस ज़रा सी थी बात ही तो की तुम से शहर भर के आवाज़े सुन रहे हो अब बोलो, सर-फिरी हवाओं में घर से क्यूँ निकल आए बज रहे हैं दरवाज़े सुन रहे हो अब बोलो, जिस के … Read more