उस के तर्ज़-ए-गुफ़्तुगू पे दिल फ़िदा हो जाएगा

us ke tarz-e-guftugu pe dil fida ho jaega - उस के तर्ज़-ए-गुफ़्तुगू पे दिल फ़िदा हो जाएगा

उस के तर्ज़-ए-गुफ़्तुगू पे दिल फ़िदा हो जाएगा हाँ मगर ये दिल कभी सहरा नुमा हो जाएगा, हो अगर मुमकिन सदफ़ की राह दिखला दे उसे वर्ना हर क़तरा हवाओं में हवा हो जाएगा, आदमी ने आज तक खोया नहीं अपना वजूद आईना टूटा अगर तो हादिसा हो जाएगा, बाँध ले रख़्त-ए-सफ़र जब फ़ासले का … Read more

वो चाँद अब्र से जिस वक़्त बे-नक़ाब हुआ

wo chand abr se jis waqt be-naqab hua - वो चाँद अब्र से जिस वक़्त बे-नक़ाब हुआ

वो चाँद अब्र से जिस वक़्त बे-नक़ाब हुआ अजब शबाब के आलम में इंक़लाब हुआ, जुनूँ के हिस्से में सहरा-नवर्दियाँ आईं तमाम उम्र कहाँ इश्क़ बारयाब हुआ, चमन में नग़्मा-सरा क्यों कोई नहीं मिलता हुआ तो कौन से मौसम का है इताब हुआ, मिरी ज़बाँ पे तो हर्फ़-ए-गिला नहीं आया वो आप अपने अमल से … Read more