तुम को भुला रही थी कि तुम याद आ गए

tum ko bhula rahi thi ki tum yaad aa gae - तुम को भुला रही थी कि तुम याद आ गए

तुम को भुला रही थी कि तुम याद आ गए मैं ज़हर खा रही थी कि तुम याद आ गए, कल मेरी एक प्यारी सहेली किताब में इक ख़त छुपा रही थी कि तुम याद आ गए, उस वक़्त रात-रानी मिरे सूने सहन में ख़ुशबू लुटा रही थी कि तुम याद आ गए, ईमान जानिए … Read more

मिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब था

milna tha ittifaq bichhadna nasib tha

मिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब था वो उतनी दूर हो गया जितना क़रीब था, मैं उस को देखने को तरसती ही रह गई जिस शख़्स की हथेली पे मेरा नसीब था, बस्ती के सारे लोग ही आतिश-परस्त थे घर जल रहा था और समुंदर क़रीब था, मरियम कहाँ तलाश करे अपने ख़ून को हर शख़्स … Read more