मद्धम हुई तो और निखरती चली गई

Maddham Hui to Aur Nikharti Chali Gai - मद्धम हुई तो और निखरती चली गई

मद्धम हुई तो और निखरती चली गई ज़िंदा है एक याद जो मरती चली गई, थी ज़िंदगी की मिस्ल शब-ए-हिज्र दोस्तो और ज़िंदगी की मिस्ल गुज़रती चली गई, हम से यहाँ तो कुछ भी समेटा न जा सका हम से हर एक चीज़ बिखरती चली गई, आए थे चंद ज़ख़्म गुज़र-गाह-ए-वक़्त पर गुज़री हवा-ए-वक़्त तो … Read more

बन के साया ही सही सात तो होती होगी

Ban Ke Saya Hi Sahi Sat to Hoti Hogi - बन के साया ही सही सात तो होती होगी

बन के साया ही सही सात तो होती होगी कम से कम तुझ में तिरी ज़ात तो होती होगी, ये अलग बात कोई चाँद उभरता न हो अब दिल की बस्ती में मगर रात तो होती होगी, धूप में कौन किसे याद किया करता है पर तिरे शहर में बरसात तो होती होगी, हम तो … Read more