मिटाता ही रहा ख़ुद को रुलाता ही रहा ख़ुद को

Mitata Hi Raha Khud Ko Rulata Hi Raha Khud Ko - मिटाता ही रहा ख़ुद को रुलाता ही रहा ख़ुद को

मिटाता ही रहा ख़ुद को रुलाता ही रहा ख़ुद को जला कर ख़त मोहब्बत के बुझाता ही रहा ख़ुद को, चला कर फ़ोन में शब भर कहीं जगजीत की ग़ज़लें लगा कर कश मैं सिगरेट के जलाता ही रहा ख़ुद को, हुआ जो क़त्ल ख़्वाबों का बहा आँसू का जो दरिया तो फिर नमकीन पानी … Read more

मोहब्बत का गुलशन सजाने लगे हैं

Mohabbat Ka Gulshan Sajaane Lage Hain - मोहब्बत का गुलशन सजाने लगे हैं

मोहब्बत का गुलशन सजाने लगे हैं हम अपनी वफ़ा को निभाने लगे हैं, उठी थी जो दीवार नफ़रत की दिल में उसे रफ़्ता रफ़्ता गिराने लगे हैं, झुका कर जो नज़रें थे ख़मोश बैठे वही दर्द अपना बताने लगे हैं, जिन्हें प्यार के फूल हम ने थे भेजे वही दिल पे ख़ंजर चलाने लगे हैं, … Read more