तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ

tere ishq ki intiha chahta hun - तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ

तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ, सितम हो कि हो वादा-ए-बे-हिजाबी कोई बात सब्र-आज़मा चाहता हूँ, ये जन्नत मुबारक रहे ज़ाहिदों को कि मैं आप का सामना चाहता हूँ, ज़रा सा तो दिल हूँ मगर शोख़ इतना वही लन-तरानी सुना चाहता हूँ, कोई दम का मेहमाँ हूँ ऐ अहल-ए-महफ़िल … Read more

सितारों से आगे जहाँ और भी हैं

sitaron se aage jahan aur bhi hain

सितारों के आगे जहाँ और भी हैं अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं, तही ज़िन्दगी से नहीं ये फ़ज़ायें यहाँ सैकड़ों कारवाँ और भी हैं, क़ना’अत न कर आलम-ए-रंग-ओ-बू पर चमन और भी, आशियाँ और भी हैं, अगर खो गया एक नशेमन तो क्या ग़म मक़ामात-ए-आह-ओ-फ़ुग़ाँ और भी हैं, तू शाहीं है परवाज़ है … Read more