इक सुब्ह है जो हुई नहीं है

ek subh hai jo hui nahin hai - इक सुब्ह है जो हुई नहीं है

इक सुब्ह है जो हुई नहीं है इक रात है जो कटी नहीं है, मक़्तूलों का क़हत पड़ न जाए क़ातिल की कहीं कमी नहीं है, वीरानों से आ रही है आवाज़ तख़्लीक़-ए-जुनूँ रुकी नहीं है, है और ही कारोबार-ए-मस्ती जी लेना तो ज़िंदगी नहीं है, साक़ी से जो जाम ले न बढ़ कर वो … Read more

मेरा सफ़र – अली सरदार जाफरी

mera safar - मेरा सफ़र

फिर इक दिन ऐसा आएगा आंखों के दीये बुझ जाएंगे हाथों के कंवल कुम्हलाएंगे और बर्ग-ए-ज़बां से नुत्क़ ओ सदा की हर तितली उड़ जाएगी इक काले समुंदर की तह में कलियों की तरह से खिलती हुई फूलों की तरह से हंसती हुई सारी शक्लें खो जाएंगी ख़ूं की गर्दिश दिल की धड़कन सब रागनियां … Read more