ख़िज़ाँ की ज़र्द सी रंगत बदल भी सकती है

Khizan Ki Zard Si Rangat Badal Bhi Sakti Hai - ख़िज़ाँ की ज़र्द सी रंगत बदल भी सकती है

ख़िज़ाँ की ज़र्द सी रंगत बदल भी सकती है बहार आने की सूरत निकल भी सकती है, जला के शम्अ अब उठ उठ के देखना छोड़ो वो ज़िम्मेदारी से अज़-ख़ुद पिघल भी सकती है, है शर्त सुब्ह के रस्ते से हो के शाम आए तो रात उस को सहर में बदल भी सकती है, ज़रा … Read more

ज़िंदा रहने की ये तरकीब निकाली मैं ने

zinda rahne ki ye tarkib nikali maine - ज़िंदा रहने की ये तरकीब निकाली मैं ने

ज़िंदा रहने की ये तरकीब निकाली मैं ने अपने होने की ख़बर सब से छुपा ली मैं ने जब ज़मीं रेत की मानिंद सरकती पाई आसमाँ थाम लिया जान बचा ली मैं ने अपने सूरज की तमाज़त का भरम रखने को नर्म छाँव में कड़ी धूप मिला ली मैं ने मरहला कोई जुदाई का जो … Read more